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पाकिस्तानी सेना ने इस मंदिर पर गिराए थे सैकड़ों बम, लेकिन एक भी नहीं फटा, जानिए इस मंदिर का रहस्य

ByDK Media

Oct 16, 2022

हमारे भारत देश में सनातन धर्म को काफी ज्यादा मान्यता दी जाती है क्योंकी यह धर्म सबसे पहला धर्म है इसलिए इस धर्म का काफी ज्यादा माना जाता है, तो वहीं हमारे देश में कई ऐसे देवी- देवताओं के मंदिर हैं जिनका रहस्य आज तक कोई भी वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाया है, तो वहीं भारत में कुछ मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए भी बहुत ज्यादा प्रसिद्ध हैं और कुछ अपनी विशेषता के लिए। यहां कई प्राचीन मंदिर हैं, जहां कई रहस्य भी छिपे हैं। कुछ मंदिरों को लेकर तरह-तरह की कहानियां भी प्रचलित हैं।
ऐसा ही एक अनोखा और प्राचीन मंदिर है राजस्थान में भारत और पाकिस्तान की सीमा पर स्थित तनोट माता का मंदिर। मंदिर हमेशा से आस्था का केंद्र रहा है, लेकिन 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद यह मंदिर अपने चमत्कारों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हो गया था। जिसके बाद से इस मंदिर को सेना का मंदिर कहा जाता है, खबरो से मिली जानकारी के अनुसार उस लड़ाई के दौरान पाकिस्तान ने इस मंदिर पर करीब 3000 बम गिराए थे, लेकिन मंदिर को कोई नुकसान नहीं हुआ था।
बताया जाता है की पाकिस्तान की सेना ने इस मंदिर पर करीब 450 बमों को फेंका था लेकिन जैसे ही इस मंदिर के परिसर में बम गिरते लेकिन वह विस्फोट नहीं होते थे। उन बमों को मंदिर के संग्रहालय में दर्शनार्थियों के लिए रखा जाता है। बीएसएफ ने युद्ध के बाद मंदिर की सुरक्षा संभालते हुए वहां चौकी भी लगा दी है। तनोट माता को अवदा माता के नाम से भी जाना जाता है। उन्हें हिंगलाज माता का एक रूप माना जाता है। हिंगलाज माता का शक्ति पीठ पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित है।
हर साल अश्विन और चैत्र मास की नवरात्रि के दौरान यहां एक विशाल मेले का भी आयोजन किया जाता है। इस मंदिर के बारे में कई प्राचीन कथाएं भी प्रचलित हैं। बताया जाता है की प्राचीन समय पहले मां हिंगलाज से संतान प्राप्ति के लिए ममदिया नाम का एक चरवाहा सात बार शक्तिपीठ आया था। माँ प्रसन्न हुई और चरण के सपने में आई और उनकी इच्छा पूछी। उन्होंने कहा कि आप यहां मेरे साथ पैदा हुए हैं। माँ ने चरण की प्रार्थना स्वीकार की और उन्हें 7 बेटियों और 1 बेटे का आशीर्वाद दिया। अवधा विक्रम संवत 808 में एक चरवाहे से पैदा हुई सात बेटियों में से एक थी।

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