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धनतेरस से होगी दीपोत्सव की शुरूआत, नरक चौदस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज को लेकर फैली भ्रांतियां और उसका निवारण

ByDK Media

Oct 20, 2022

दीपोत्सव की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं. धनतेरस से दीपोत्सव की शुरूआत होगी. आपको बता दें कि गत कई सालों में ये देखने में आ रहा है कि किसी ना किसी तरह से पर्व को लेकर के फेसबुक, यूट्यूब आदि के माध्यम से बहुत सारी भ्रांतियां फैलाई जा रही है. जैसे रक्षाबंधन को लेकर के होली को लेकर के इस साल फैली हुई थी. इसी तरह दीपावली को भी लेकर के कई सारी भ्रांतियां फैली है, कई लोगों का कहना है कि धनतेरस 22 को है, तो कुछ लोग 23 को बता रहे हैं. नरक चतुर्दशी कई 23 की बता रहे हैं तो कई लोग 24 की बता रहे हैं. यहां तक कि कई लोग तो सूर्यग्रहण को लेकर के बता रहे हैं कि दिवाली के दिन सूर्य ग्रहण है तो कई लोग बता रहे हैं कि दिवाली की रात को ही सूर्य ग्रहण है तो इन सभी फैली भ्रांतियों का निराकरण हम शास्त्रोक्त विधि से बता देते है कि किस दिन कौन सा पर्व मनाया जाएगा।

धनतेरस पर्व: ये पर्व कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन धूम धाम से मनाया जाता है जो कि इस बार 22 अक्टूबर दिन शनिवार को मनाया जाएगा. शास्त्रोक्त विधि से देखा जाए तो धनतेरस पर्व को लेकर के शास्त्रीय व्यवस्था– धनतेरस प्रदोष व्यापिनी कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाई जाती है. यदि दोनों दिन ये तिथि प्रदोष व्यापिनी त्रयोदशी व्याप्त हो तो धनतेरस दूसरे दिन मनाई जाती है अन्यथा पहले ही दिन मनाई जाती है दीपदान भी धनतेरस के दिन प्रदोष काल में ही किया जाता है. लोकविजय पञ्चांग मुताबिक इस साल त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 22 अक्टूबर शाम 04:20 से हो रहा है जिसका समापन 23 अक्टूबर को 04:51 पर होगा. शास्त्रीय नियम मुताबिक 23 अक्टूबर को 4:51 पर ही त्रयोदशी तिथि समाप्त हो जाएगी तो फिर त्रयोदशी तिथि प्रदोष व्यापिनी नहीं कहलाएगी इसलिए 22 अक्टूबर को ही धनतेरस मनाना उचित है.

रूप चौदस/ नरक चतुर्दशी: ये पर्व कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन मनाया जाता है जो इस वर्ष 23 अक्टूबर को मनाया जाएगा. नरक चतुर्दशी को लेकर शास्त्रीय मत जिस दिन जिस दिन चतुर्दशी तिथि सूर्य उदय और चंद्रोदय व्यापिनी हो उस दिन नरक चतुर्दशी मनाया जाना चाहिए. अगर चतुर्दशी दोनों ही दिन चंद्रोदय और सूर्य उदय व्यापिनी हो या ना हो तो नरक चतुर्दशी पहले दिन ही मनाया जाना चाहिए. तो इस साल 23 अक्टूबर को चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्दशी तिथि होगी. इस कारण से 23 अक्टूबर को नरक चतुर्दशी मनाया जाना चाहिए.

दीपावली: ये पर्व कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है. जो इस साल 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा. दिवाली को लेकर के शास्त्रीय मत प्रदोष (सूर्यास्त के बाद के तीनो मुहूर्त ) व्यापनी कार्तिक अमावस्या के दिन दीपावली का पर्व मनाया जाता है यदि अमावस्या प्रदोष काल में दोनों दिन व्याप्त हो या आव्याप्त हो तो दूसरे दिन मनाई जानी चाहिए. इस नियमानुसार 24 अक्टूबर को ही दिवाली मनाई जानी चाहिए

सूर्य ग्रहण: 25 अक्टूबर 2022 को कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मंगलवार के दिन स्वाति नक्षत्र और तुला राशि पर सूर्य ग्रहण रहेगा. इस ग्रहण का सूतक 4 प्रहर पहले अर्थात सोमवार प्रातः 4:23 से लगेगा, किंतु बालक वृद्ध रोगी को एक पहर पूर्व अर्थात दिन में 1:30 से सूतक मानना चाहिए. ग्रहण का स्पर्श मंगलवार को 4:23 पर होगा एवं इसका मोक्ष 06:25 पर होगा ग्रहण की कुल अवधि 2 घंटे 2 मिनट होगी.

गोवर्धन पूजा : ये पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन मनाया जाता है जो इस वर्ष 26 अक्टूबर को मनाया जाएगा. सामान्यता है ये पर्व दिवाली के दूसरे दिन मनाया जाता है लेकिन इस साल ग्रहण होने की वजह से दिवाली के दूसरे दिन पुल पर बनी मनाया जाएगा इस कारण से ग्रहण के अगले दिन मनाया जाएगा.

भाई दूज: भाई बहनों का ये पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है जिसे यम द्वितीया भी कहा जाता है. इस साल ये पर्व 27 अक्टूबर को मनाया जाएगा.

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