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परीक्षा में फेल होने पर युवक ने यूट्यूब को ठहराया दोषी, 75 लाख का मुआवजा की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने उल्टा ठोका 25 हज़ार का जुर्माना

ByDeepak Panwar

Dec 10, 2022

एक याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यूट्यूब (Youtube) में अश्लील विज्ञापन देखने के कारण उसका ध्यान भंग हुआ और इससे वह परीक्षा में फेल हो गया। युवक ने अपनी याचिका में यूट्यूब से 75 लाख रुपए के मुआवजे की भी माँग की थी। हालाँकि, कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए उस पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। याचिकाकर्ता की पहचान, आनंद किशोर चौधरी निवासी मध्य प्रदेश के रूप में हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सजंय किशन कौल और जस्टिस अभय एस. ओक की बेंच ने शुक्रवार (9 दिसंबर 2022) को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा, “यह अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई अब तक की सबसे ‘खराब’ याचिकाओं में से एक है।”

जस्टिस कौल ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा, “आपको किस बात का मुआवजा चाहिए। आप इंटरनेट देखते हैं इसलिए या फिर इंटरनेट देखने की वजह से एग्जाम नहीं पास कर पाए, इसलिए मुआवजा चाहिए? क्योंकि विज्ञापन में सेक्सुअल कंटेंट था, इसलिए आप अदालत से मुआवजा लेने पहुँच गए। ये तो आपकी मर्जी है कि आप विज्ञापन देखें।”

सुनवाई के दौरान जस्टिस कौल ने कहा, “विज्ञापन में यौन सामग्री था, इससे आपकी अटेंशन डायवर्ट हो गई इसलिए आप कोर्ट में बोल रहे हैं मुआवजा दे दो।” कोर्ट ने कहा, “आपको विज्ञापन नहीं देखना है तो ना देखें इस तरह की याचिका को दायर करना अदालत के कीमती वक्त को बर्बाद करने जैसा है। अब आपको अपने आचरण के कारण जुर्माना भरना होगा।”

दरअसल, याचिकाकर्ता आनंद किशोर चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 19 (2) के तहत याचिका दाखिल कर कहा था कि यूटयूब पर अश्लील विज्ञापन के चलते उसका ध्यान भंग हुआ और वह मध्य प्रदेश पुलिस में भर्ती की परीक्षा पास नहीं कर पाया। इसके एवज में उसे यूट्यूब द्वारा 75 लाख का मुआवजा दिया जाना चाहिए। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में युवक ने सोशल मीडिया पर ऐसे विज्ञापनों (अश्लीलता) पर रोक लगाने की भी माँग की थी।

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